तहसील सभागार में उमड़ा जनसैलाब: अपर जिलाधिकारी ने सुनीं जनता की समस्याएं, समाधान के सख्त निर्देश

Bageshwarjan
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बागेश्वर- जनता की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित निस्तारण करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत सोमवार को तहसील सभागार में जनता दरबार का आयोजन किया गया। अपर जिलाधिकारी एन.एस. नबियाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। जनता दरबार के दौरान आम जनमानस ने बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर अपनी नाराजगी और मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। एन.एस. नबियाल ने मौके पर ही अधिकारियों की क्लास लगाते हुए स्पष्ट किया कि जनता की शिकायतों को फाइलों में दबाने के बजाय धरातल पर समाधान दिखना चाहिए। प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि आम आदमी को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

19 शिकायतों पर सीधा एक्शन: सड़क और पानी प्रमुख मुद्दे

सोमवार को आयोजित इस जनता दरबार में कुल 19 महत्वपूर्ण शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा मामले पेयजल संकट, बिजली की अघोषित कटौती और जर्जर ग्रामीण सड़कों से जुड़े रहे। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता की भी मांग उठाई। अपर जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायतकर्ता की बात को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों को मंच पर बुलाकर जवाबदेही तय की। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। अधिकारी खुद मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि समस्या का वास्तविक समाधान हुआ है या नहीं।

समाधान की सूचना देना अनिवार्य, टालमटोल पर होगी कार्रवाई

प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए अपर जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि जिस भी विभाग की समस्या का समाधान किया जाता है, उसकी सूचना अनिवार्य रूप से संबंधित शिकायतकर्ता को दी जाए। अक्सर देखा जाता है कि विभाग अपनी रिपोर्ट में शिकायत का निस्तारण दिखा देते हैं, लेकिन पीड़ित को इसकी जानकारी ही नहीं होती। एन.एस. नबियाल ने चेतावनी दी कि यदि निस्तारण में अनावश्यक देरी या टालमटोल की गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

ई-ऑफिस और सीएम हेल्पलाइन की गहन समीक्षा

जनता दरबार के तुरंत बाद अपर जिलाधिकारी ने शासन की प्राथमिकता वाली ऑनलाइन प्रणालियों की समीक्षा की। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन, ई-ऑफिस और जन समर्पण पोर्टल पर लंबित मामलों का ब्यौरा तलब किया। समीक्षा में पाया गया कि कुछ विभागों में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, जिस पर उन्होंने सख्त नाराजगी जाहिर की। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में कोई भी फाइल भौतिक रूप (कागज पर) इधर-उधर नहीं भेजी जाएगी। सभी विभागों को शत-प्रतिशत ई-ऑफिस प्रणाली को अपनाना होगा। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि फाइलों की ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगी।

जन समर्पण पोर्टल: दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति

सरकार के ‘जन समर्पण पोर्टल’ का उद्देश्य जनता को घर बैठे सेवाएं प्रदान करना है। समीक्षा बैठक में एन.एस. नबियाल ने कहा कि इस पोर्टल पर प्राप्त होने वाले आवेदनों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने समाज कल्याण और पूर्ति विभाग जैसे सार्वजनिक सेवा वाले विभागों को निर्देश दिए कि वे आवेदनों को तय समय सीमा के भीतर स्वीकृत या अस्वीकृत करें। बेवजह की आपत्तियां लगाकर आवेदनों को लटकाना जनता के साथ अन्याय है। डिजिटल माध्यमों का उपयोग इस तरह हो कि आम जनता को सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां न चढ़नी पड़ें।

विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी और सामूहिक जिम्मेदारी

इस महत्वपूर्ण बैठक और जनता दरबार में जिला विकास अधिकारी संगीता आर्या, जल निगम के अधिशासी अभियंता वी.के. रवि, जल संस्थान से दीनदयाल टम्टा और लोक निर्माण विभाग के संजय पांडे सहित कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही जिला पूर्ति अधिकारी जी.बी. पांडे और समाज कल्याण अधिकारी जसमीत कौर ने भी अपने विभागों से जुड़ी शिकायतों पर स्पष्टीकरण दिया। अपर जिलाधिकारी ने सभी को सामूहिक रूप से निर्देश दिए कि वे टीम भावना के साथ काम करें ताकि जनपद के विकास कार्यों को गति मिल सके।

जनता पर प्रभाव और भविष्य की राह

इस जनता दरबार से स्थानीय निवासियों में एक सकारात्मक संदेश गया है। जब वरिष्ठ अधिकारी सीधे जनता के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, तो प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ता है। ई-ऑफिस और जन समर्पण पोर्टल जैसी प्रणालियों के सख्ती से लागू होने के बाद अल्मोड़ा जिले में सरकारी कामकाज की गति तेज होने की उम्मीद है। सड़क और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होने से ग्रामीण इलाकों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। निष्कर्षतः, यह पहल शासन और प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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