
अल्मोड़ा -उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग ने शासन स्तर पर पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए ‘लीव मॉड्यूल’ (Leave Module) तैयार किया है। इसी क्रम में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के अधीन आने वाले चारों परिसरों में तैनात प्राध्यापकों और कर्मचारियों के लिए समर्थ पोर्टल का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। पहले चरण में विश्वविद्यालय प्रशासन सभी स्थायी कर्मचारियों और प्राध्यापकों की आईडी पोर्टल पर तैयार कर रहा है। इसके बाद, छुट्टी के लिए आवेदन से लेकर उसकी स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही संपन्न होगी।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम और क्या हैं इसकी वजहें?
अब तक विश्वविद्यालय में छुट्टी लेने के लिए पारंपरिक तरीका अपनाया जाता था। कर्मचारी हाथ से लिखे प्रार्थना पत्र देते थे, जो विभिन्न स्तरों (विभागाध्यक्ष, डीन, कुलसचिव) से होते हुए स्वीकृत होते थे। इस प्रक्रिया में अक्सर देरी होती थी और कर्मचारी को यह पता लगाने में मुश्किल होती थी कि उनकी छुट्टी स्वीकृत हुई है या नहीं।
नई व्यवस्था के तहत, कर्मचारी अपने पोर्टल अकाउंट पर लॉग-इन करेंगे और वहीं से अपनी सीएल (कैजुअल लीव), ईएल (अर्न लीव), मेडिकल लीव या सीसीएल जैसी छुट्टियों के लिए आवेदन करेंगे। यह आवेदन संबंधित अधिकारी के पास तुरंत पहुंच जाएगा। जैसे ही अधिकारी इसे डिजिटल हस्ताक्षर या क्लिक के जरिए स्वीकृत करेंगे, कर्मचारी को इसकी सूचना मिल जाएगी।
कर्मचारियों और कार्यप्रणाली पर प्रभाव
इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव कार्य संस्कृति पर पड़ेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण छुट्टियों का हिसाब-किताब रखने में गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। पहले कई बार रजिस्टर में छुट्टियों की एंट्री और वास्तविक छुट्टियों में विसंगति देखने को मिलती थी, लेकिन अब समर्थ पोर्टल पर हर कर्मचारी का लीव बैलेंस रीयल-टाइम में अपडेट होगा।
नोडल अधिकारी मनोज कुमार बिष्ट के अनुसार, यह व्यवस्था कर्मचारियों की सुविधा के लिए है ताकि उन्हें छुट्टी की मंजूरी के लिए विभाग के चक्कर न लगाने पड़ें। कर्मचारी घर बैठे ही अपने मोबाइल या कंप्यूटर से आवेदन कर सकेंगे और अपनी छुट्टी की स्थिति (Status) जान सकेंगे।
आम जनता और शिक्षा व्यवस्था पर असर
यद्यपि यह नियम सीधे तौर पर कर्मचारियों से जुड़ा है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष लाभ छात्रों और आम जनता को मिलेगा। जब प्रशासनिक कार्य डिजिटल और पारदर्शी होते हैं, तो शिक्षकों का ध्यान पढ़ाने पर अधिक केंद्रित रहता है। फाइलों के इधर-उधर घूमने में होने वाली देरी कम होगी, जिससे विश्वविद्यालय के अन्य शैक्षणिक कार्य भी समय पर पूरे हो सकेंगे। भविष्य में यह व्यवस्था राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी समान रूप से लागू की जाएगी, जिससे पूरे प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली में एकरूपता आएगी।
आगे क्या बदलेगा?
आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन इस पोर्टल के जरिए अन्य सेवाओं को भी जोड़ने की योजना बना रहा है। फिलहाल प्राथमिकता सभी कर्मचारियों का डेटाबेस अपडेट करने और उन्हें ऑनलाइन सिस्टम के प्रति प्रशिक्षित करने की है। कुलपति, कुलसचिव और परिसर निदेशकों को भी इस पोर्टल के माध्यम से सीधे निगरानी करने का अधिकार होगा, जिससे अनुशासन और जवाबदेही बढ़ेगी।
निष्कर्ष: सुशासन की ओर एक प्रभावी कदम
एसएसजे विश्वविद्यालय द्वारा समर्थ पोर्टल के माध्यम से अवकाश प्रक्रिया को ऑनलाइन करना ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘गुड गवर्नेंस’ की दिशा में एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल कागजों की बर्बादी रुकेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाओं पर भी लगाम लगेगी। एक आधुनिक शैक्षणिक संस्थान के लिए यह आवश्यक है कि वह तकनीक को अपनाए ताकि उसके कर्मचारी और शिक्षक बिना किसी प्रशासनिक बाधा के अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।